घर ‘सुकून’ है !

आपके विचार में ऐसा कौनसा शब्द है जो घर कहते ही आपके मन में आता है? जो घर से जुड़ी भावना को बख़ूबी दर्शाता है? चाहे छोटा हो या बड़ा, शहर में हो या गाँव में, एक कमरे का मकान हो या दस कमरों का आलीशान महल घर घर ही होता है, उतना ही अज़ीज़, उतना ही ख़ास, उतने ही चाव से बनाया और सजाया … Continue reading घर ‘सुकून’ है !

जीवन क्या है?

माँ के आँचल में पनपने से माँ के आँचल को तरसने का सफ़र, ख़ुद माँ के आँचल को तरसके भी अपने बच्चों का आँचल बनने की एक अनोखी डगर। पापा को हीरो समझने से पापा को बातें समझाने का सफ़र, और स्मरण में पापा की यादें बसाए अपने बच्चों का हीरो बनने की अनुभवी डगर । मन के किसी कोने में बचपन को संजोए हुए … Continue reading जीवन क्या है?

Papa Aur Main

पापा और मैं हर बार जब मैं बंबई का घर छोड़कर दिल्ली आती हूँ, अपनी आँखों की नमी को बड़ी सी मुस्कान के पीछे बख़ूबी छिपातीं हूँ । पापा कहीं मेरी उदासी न देखें यही डर मन में रहता है, आख़िर बेटी का घर बसाने हर पिता ये बिछड़ने का दुख हँसकर जो सहता है! जानती हूँ मैं तो अपने भरे पूरे घर मुड़कर ससुराल … Continue reading Papa Aur Main

Haath nahi chodna, saath nahi chodna

I read this verse somewhere on the internet – राम युद्ध में तभी जीते जब उनका भाई उनके साथ था और रावण युद्ध में इसलिए हारा क्योंकि उसका भाई उसके ख़िलाफ़ था ! The verse says it all, clear, crisp and to the point. Today on International Brother’s Day I have penned down a poetry on the feelings of a brother who’s brother is not … Continue reading Haath nahi chodna, saath nahi chodna

सफ़र ज़िंदगी का…

किसने कहा तुमसे के ज़िंदगी ‘आसान’ होगी ? ये तो कभी गर्म धूप कभी ठंडी – ठंडी छाँव होगी, इसमें बारिश की सुखद बूँदें होंगी और रेगिस्तान की तपती लू भी, कभी पूरे होते सपने होंगे, कभी दिल में दबी आरज़ू भी, कभी मुस्कान भरी सुबह होगी, कभी आंसुओं से भीगी रातें, कुछ दिल से जीएँ क़िस्से कहानियाँ, कई अनकही अधूरी बातें, जैसा भी आएगा … Continue reading सफ़र ज़िंदगी का…