आजा मेरी प्यारी चिड़िया !!

चूँ-चूँ-चीं-चीं करतीं चिड़ियाँ, हर आँगन में फुदकतीं चिड़ियाँ, खिड़कियों के फ़लक, रोशन-दान के आड़े, घास बुन-बुन घोंसले बनातीं चिड़ियाँ । सूरज कि पहली किरन के संग स्वर सुरीले यूँ गाती चिड़ियाँ, नन्हें राकेश के कोमल मन को खुश कर बहुत ही भाँति चिड़ियाँ । कहते थे बाबा, “ सुन लो राकेश, पंखा तेज़ न चलाना तुम। कोटर में घर उसने बना रखा है, अपनी लापरवाही … Continue reading आजा मेरी प्यारी चिड़िया !!

घर ‘सुकून’ है !

आपके विचार में ऐसा कौनसा शब्द है जो घर कहते ही आपके मन में आता है? जो घर से जुड़ी भावना को बख़ूबी दर्शाता है? चाहे छोटा हो या बड़ा, शहर में हो या गाँव में, एक कमरे का मकान हो या दस कमरों का आलीशान महल घर घर ही होता है, उतना ही अज़ीज़, उतना ही ख़ास, उतने ही चाव से बनाया और सजाया … Continue reading घर ‘सुकून’ है !

Can I Be A Butterfly Please….

As toddlers explore the world and learn new words and observe things around them, they apply their imagination to everything and come up with beautiful thoughts full of innocence which never fails to leave a mark in the hearts of their families. Every child has some dream, some role model, some position they wish to achieve or what they want to become when they grow … Continue reading Can I Be A Butterfly Please….

जीवन क्या है?

माँ के आँचल में पनपने से माँ के आँचल को तरसने का सफ़र, ख़ुद माँ के आँचल को तरसके भी अपने बच्चों का आँचल बनने की एक अनोखी डगर। पापा को हीरो समझने से पापा को बातें समझाने का सफ़र, और स्मरण में पापा की यादें बसाए अपने बच्चों का हीरो बनने की अनुभवी डगर । मन के किसी कोने में बचपन को संजोए हुए … Continue reading जीवन क्या है?