Papa Aur Main

पापा और मैं हर बार जब मैं बंबई का घर छोड़कर दिल्ली आती हूँ, अपनी आँखों की नमी को बड़ी सी मुस्कान के पीछे बख़ूबी छिपातीं हूँ । पापा कहीं मेरी उदासी न देखें यही डर मन में रहता है, आख़िर बेटी का घर बसाने हर पिता ये बिछड़ने का दुख हँसकर जो सहता है! जानती हूँ मैं तो अपने भरे पूरे घर मुड़कर ससुराल … Continue reading Papa Aur Main