ख़्याल

जो ख़ुशी दे तुम्हें वो ख़्याल अच्छा है, बशर्ते दिल ना दुखे किसी का तो ख़्याल सच्चा है । ज़रूरी नहीं के आसमान को छूती लंबी इमारत ही हो, जो सुकून दे दिल को तुम्हारे तो दो कमरों का मकान अच्छा है । संरचना कि अहमियत फिर क्या ही है जनाब जो प्यार भरा हो हर वो आशिया बढ़िया है । साथ अनगिनत वर्षों का … Continue reading ख़्याल

Saat Phero Ka Saath

लेकर सात फेरे हमने वादे किए,रस्मों -रिवाजों से हम बंध गए,पर क्या ये मंडप, पंडित, कुछ घंटों के मंत्र-जाप हमें सच में बांध पाएँगे ?एक दिन का मिलाप है जो अब हम उम्र भर निभाएँगे ! क्या सच में मुमकिन है सिर्फ़ सात फेरों सेदिलों का एक पल में मिल जाना?मात्र सात फेरों से ही क्या तय होता हैजीवन का सुखमय होना? या दिये संग … Continue reading Saat Phero Ka Saath

Satya (Truth)

There is your truth and there is my truth. As for the universal truth, it does not exists . – Amish Tripathi, author of the Shiva Triology सत्य एक पल में दिन है कहीं, दुजे ही पल में रात, गर्मी से तपती धरा कहीं, कहीं बरखा कि बौछार! दोनों ही सच्चे अपनी जगह, दोनों की अपनी छाप, जो सभी सत्य है अपने आप में फिर … Continue reading Satya (Truth)

Batraji aur Corona ka khauf…!

This poetry is based on a fictitious character ‘Batraji’ and his emotional roller coaster ride on catching a cold during the on going phase of Covid-19 pandemic and it’s aftermath. I have tried to convey a subtle message of using one’s own mind in a balanced way to handle a challenging situation instead of letting the horses of negative thoughts run wild and play with … Continue reading Batraji aur Corona ka khauf…!