जीवन क्या है?

माँ के आँचल में पनपने से माँ के आँचल को तरसने का सफ़र, ख़ुद माँ के आँचल को तरसके भी अपने बच्चों का आँचल बनने की एक अनोखी डगर। पापा को हीरो समझने से पापा को बातें समझाने का सफ़र, और स्मरण में पापा की यादें बसाए अपने बच्चों का हीरो बनने की अनुभवी डगर । मन के किसी कोने में बचपन को संजोए हुए … Continue reading जीवन क्या है?

Cockroach, Cockroach Lying On The Floor

Today morning when we woke up my three year old Soham was dancing around, “MUMMA susu, MUMMA susu!!” So we both rushed to the washroom where on the floor was lying a dead cockroach. Seeing it Soham was reluctant to step in and said, “ yaha toh cockroach hai, hum kaise jayenge?” ( There is a cockroach here, how will we go in there) I … Continue reading Cockroach, Cockroach Lying On The Floor

Haath nahi chodna, saath nahi chodna

I read this verse somewhere on the internet – राम युद्ध में तभी जीते जब उनका भाई उनके साथ था और रावण युद्ध में इसलिए हारा क्योंकि उसका भाई उसके ख़िलाफ़ था ! The verse says it all, clear, crisp and to the point. Today on International Brother’s Day I have penned down a poetry on the feelings of a brother who’s brother is not … Continue reading Haath nahi chodna, saath nahi chodna

सफ़र ज़िंदगी का…

किसने कहा तुमसे के ज़िंदगी ‘आसान’ होगी ? ये तो कभी गर्म धूप कभी ठंडी – ठंडी छाँव होगी, इसमें बारिश की सुखद बूँदें होंगी और रेगिस्तान की तपती लू भी, कभी पूरे होते सपने होंगे, कभी दिल में दबी आरज़ू भी, कभी मुस्कान भरी सुबह होगी, कभी आंसुओं से भीगी रातें, कुछ दिल से जीएँ क़िस्से कहानियाँ, कई अनकही अधूरी बातें, जैसा भी आएगा … Continue reading सफ़र ज़िंदगी का…