TERE CHALE JAANE SE …

तेरे चले जाने से…. बच्चे अपने घर बसे , माता-पिता भी चल बसें, भाई-बहन पीछे छूटें, किसे मनाऊँ अकेले में अब, कौन भला मुझसे रूठे । सूनापन दिल में है मेरे, रहने को यह ख़ाली मकान, बस यादों से भरी संग चार दिवारें , तस्वीरों से भरा एक संदूक रखा। सब एक-एक करके चले गए, जीवन में अपनी दिशा चुने, बिछड़ने का ग़म उनसे दिल … Continue reading TERE CHALE JAANE SE …

आजा मेरी प्यारी चिड़िया !!

चूँ-चूँ-चीं-चीं करतीं चिड़ियाँ, हर आँगन में फुदकतीं चिड़ियाँ, खिड़कियों के फ़लक, रोशन-दान के आड़े, घास बुन-बुन घोंसले बनातीं चिड़ियाँ । सूरज कि पहली किरन के संग स्वर सुरीले यूँ गाती चिड़ियाँ, नन्हें राकेश के कोमल मन को खुश कर बहुत ही भाँति चिड़ियाँ । कहते थे बाबा, “ सुन लो राकेश, पंखा तेज़ न चलाना तुम। कोटर में घर उसने बना रखा है, अपनी लापरवाही … Continue reading आजा मेरी प्यारी चिड़िया !!

घर ‘सुकून’ है !

आपके विचार में ऐसा कौनसा शब्द है जो घर कहते ही आपके मन में आता है? जो घर से जुड़ी भावना को बख़ूबी दर्शाता है? चाहे छोटा हो या बड़ा, शहर में हो या गाँव में, एक कमरे का मकान हो या दस कमरों का आलीशान महल घर घर ही होता है, उतना ही अज़ीज़, उतना ही ख़ास, उतने ही चाव से बनाया और सजाया … Continue reading घर ‘सुकून’ है !

जीवन क्या है?

माँ के आँचल में पनपने से माँ के आँचल को तरसने का सफ़र, ख़ुद माँ के आँचल को तरसके भी अपने बच्चों का आँचल बनने की एक अनोखी डगर। पापा को हीरो समझने से पापा को बातें समझाने का सफ़र, और स्मरण में पापा की यादें बसाए अपने बच्चों का हीरो बनने की अनुभवी डगर । मन के किसी कोने में बचपन को संजोए हुए … Continue reading जीवन क्या है?

Papa Aur Main

पापा और मैं हर बार जब मैं बंबई का घर छोड़कर दिल्ली आती हूँ, अपनी आँखों की नमी को बड़ी सी मुस्कान के पीछे बख़ूबी छिपातीं हूँ । पापा कहीं मेरी उदासी न देखें यही डर मन में रहता है, आख़िर बेटी का घर बसाने हर पिता ये बिछड़ने का दुख हँसकर जो सहता है! जानती हूँ मैं तो अपने भरे पूरे घर मुड़कर ससुराल … Continue reading Papa Aur Main