मेरी विदाई

सात फेरे लेकर, मुझे कन्यादान में देकर, बेटी से बहूँ बनते ही मेरी विदाई हो गई, जिनकी थी मैं राज दुलारी, प्यारी बिटिया, लाड़ों रानी, बनके उन्हीं की आँखों का पानी क्षणभर में देखो मैं पराई हो गई ! पापा कहते थे मैं हूँ प्यारी गुड़िया आँगन की चूँ-चूँ करती चिड़िया, उनके जीवन का मैं हूँ अभिमान, मुझमें ही बस्ती है उनकी जान । माँ … Continue reading मेरी विदाई