माँ

माँ सिर्फ़ एक प्यारा सा शब्द नही,‘ माँ ‘ एक ज़िम्मेदारी है,तुम्हें अनुशासन शिष्टाचार सिखाती,रखती जीवनभर की यारी है,चोट लगे तो माँ कराहोदुख-दर्द में उसे पास तुम पाओ,ख़ुशी के आसीस देनेवाली है,हर गलती तुम्हारी सुधारकर,फिर चाहे डाँटकर, फटकारकर,कान खींच या पुचकारकरजिस भी तरह मुमकिन होतुम्हारे जीवन कोसही आकार देनेवाली है,जीवन भर परछाई बनपरवरिश करे, सँभाले ,अपनी छाप जो मरणोपरांत भीसंस्कारों के रूप मेंतुम पर हमेशा … Continue reading माँ