जीवन क्या है?

माँ के आँचल में पनपने से माँ के आँचल को तरसने का सफ़र, ख़ुद माँ के आँचल को तरसके भी अपने बच्चों का आँचल बनने की एक अनोखी डगर। पापा को हीरो समझने से पापा को बातें समझाने का सफ़र, और स्मरण में पापा की यादें बसाए अपने बच्चों का हीरो बनने की अनुभवी डगर । मन के किसी कोने में बचपन को संजोए हुए … Continue reading जीवन क्या है?

Papa Aur Main

पापा और मैं हर बार जब मैं बंबई का घर छोड़कर दिल्ली आती हूँ, अपनी आँखों की नमी को बड़ी सी मुस्कान के पीछे बख़ूबी छिपातीं हूँ । पापा कहीं मेरी उदासी न देखें यही डर मन में रहता है, आख़िर बेटी का घर बसाने हर पिता ये बिछड़ने का दुख हँसकर जो सहता है! जानती हूँ मैं तो अपने भरे पूरे घर मुड़कर ससुराल … Continue reading Papa Aur Main